कीचड़ और कमल

Published by Balraj Arpit on

हमने बहुत बार कीचड़ में कमल का फूल देखा होगा लेकिन कभी उस कमल के फूल पे कीचड़ का दाग़ देखा है?

जहां कमल का फूल खिलता है वहां कीचड़ नहीं दिखता क्यूंकि वो वजह कमल के पत्तो से ढका रहता है। कमल जहां रहता है वहा हमेशा कीचड़ की इज्जत को ढके रहता है जब तक कि कोई शैतान उसमे पत्थर ना उछाले। वर्ना कीचड़ क्यों ख़ुद से कमल पे उछलता?

एक गांव में एक शैतान था, उसकी अकड़ के कारण उसके बच्चे गधा बन गए तो बुढ़ापे में भी उन्हें गोदी में खिलाना पड़ता था। उस बूढ़े को कोई भी ख़ूबसूरत चीज़ अच्छा नहीं लगता वर्ना आज उस गांव में ढेर सारे कमल के फूल होते।

दरअसल जब भी कोई कमल के फूल को वो बूढ़ा व्यक्ति देखता, पत्थर उछाल-उछाल के कीचड़ से भर देता। फिर सबसे कहता कि कमल विषैला हो गया था। कमल विषैला नहीं, उस बूढ़े व्यक्ति की सोच विषैली थी। उसके बच्चे उससे जवाब मांगते कि वो उन्हें क्यों गधा बनाया तो वो जवाब देता कि वो उन्हें गधा नहीं बनाया और वो मान लेते। गधा को कुछ भी बनाके उसको गधा बनाना आसान होता है।

ऐसा देख एक डॉक्टर साहब ने ऐसा कमल तैयार किया जिसपे कीचड़ उछालने पे कीचड़ फिसल जाते और वो कमल फिर से ख़ूबसूरत दिखने लगता। बहुत कोशिश किया, निरंतर 4-5 साल तक, उस बूढ़े इंसान ने कीचड़ उछालते रहा लेकिन कुछ काम ना आया।

एक दिन खुरपाती सूझा उस बूढ़े के दिमाग़ में, अपने साथ कुछ गधों को लेकर कूद गया कीचड़ में और फंस गया। कमल उसे देख के मुस्कुराता और लोग कीचड़ में थूकते तो सीधे उसके चेहरे पे पड़ता।

उन्हें कोई कीचड़ से नहीं निकाल रहा बल्कि लोग चुपचाप तमाशा देख रहे है और भीतर ही भीतर उसे देख सब मुस्कुराते है। और वो कमल अपने पत्तो से इनकी इज्ज़त ढकने का कोशिश कर रहा लेकिन उन्हें बहुत गुरूर है खुद पे। आज भी वो कमल के ऊपर कीचड़ उछालने के बारे में ही सोचते है और जब भी वो हाथ में कीचड़ लेते, फेंकते वक़्त खुद फिसल कर गिर जाते।

अगर उस कमल को ग़रूर होता तो कीचड़ के साथ साजिश रच के उन्हें कीचड़ में ही डूबा देता और आज हर अख़बार के सुर्खियों में इनका नाम होता।

Facebook Comments


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *